Kriya (verb)
क्रिया
क्रिया (verb)
क्रिया - जिन शब्दों
से किसी कार्य के होने या करने का बोध होता है, उन्हें
किया कहते हैं| जैसे-चलना, फिरना, उठना, बैठना, आदि | अर्थात जो कार्य
हम सुबह से शाम तक करते हैं , वे सभी कार्य
क्रिया कहलाते हैं |
क्रिया के भेद (types
of verb)- क्रिया का वर्गीकरण दो आधार पर किया जाता है-
1. कर्म के आधार पर
2.
रचना के आधार पर
कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं -
सकर्मक क्रिया (transitive) verb
अकर्मक क्रिया (intransitive verb)
सकर्मक क्रिया-(transitive verb )जिन क्रिया
शब्दों में कार्य का फल कर्म पर पड़ता
है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं| जैसे-
I सीता
पुस्तक पढ़ती है|
Ii रसिका
गीत गाती है|
पहचान- इन
वाक्यों में क्रिया में 'क्या' लगाने
पर उत्तर मिलता है|
इस क्रिया के भी दो भेद हैं -
पूर्ण सकर्मक क्रिया
अपूर्ण सकर्मक क्रिया
पूर्ण सकर्मक क्रिया -
इसमें एक या दो कर्म होते हैं इस प्रकार इसके भी दो भेद होते
है -एक कर्मक
क्रिया और द्वि कर्मक
क्रिया जैसे-
I मोहन
पुस्तक पढ़ता है| ((यहाँ पर एक कर्म
है)
Ii मोहन
सोहन के साथ पुस्तक पढ़ता है| (यहाँ पर दो कर्म हैं)
III रमा
गाय को घास खिला रही है|(यहाँ पर दो कर्म
हैं)
iv राधा ने मैडम को गीत सुनाया| (यहाँ पर दो कर्म हैं)
अकर्मक क्रिया
(intransitive verb)- जिन वाक्यों में कोई कर्म नहीं होता और जहाँ पर क्रिया का प्रभाव
सीधे करता पर पड़ता है, वहां पर अकर्मक
क्रिया होती है इसके भी दो भेद होते हैं- पूर्ण अकर्मक क्रिया और अपूर्ण अकर्मक
क्रिया जैसे -
राम गया|
(पूर्ण अकर्मक क्रिया)
सुप्रिया सो रही है|( पूर्ण अकर्मक
क्रिया)
पक्षी आकाश में उड़ रहे हैं|( पूर्ण अकर्मक
क्रिया)
राम बीमार है| (अपूर्ण अकर्मक क्रिया)
सोहन पढ़ाकू लगा| (अपूर्ण अकर्मक क्रिया)
वे ईमानदार लगे| (अपूर्ण अकर्मक क्रिया)
यहाँ बीमार, पढ़ाकू, ईमानदार आदि शब्दों के विना ये वाक्य अपूर्ण लगेंगे
जबकि ये शब्द कर्म नहीं हैं|
अकर्मक से सकर्मक क्रिया बनाना -
मुड़ना से मोड़ना
जुड़ना से जोड़ना
खुलना से खोलना
कूदना से कुदाना
गिरना से गिराना
हँसना से हँसाना
पहचान- इसकी सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब क्रिया में
'क्या' लगाने पर उत्तर मिल जाए तो वहां पर सकर्मक क्रिया होती है| यदि नहीं तो
वहाँ पर अकर्मक क्रिया होगी|
रचना के आधार पर क्रिया के भेद-
1. मुख्य
क्रिया (main verb)
2. संयुक्त क्रिया (compound verb)
3. नाम धातु क्रिया (nominal verb)
4. प्रेरणार्थक क्रिया (causal verb)
5. पूर्वकालिक क्रिया (Absolutive verb)
1. मुख्य
क्रिया - जब वाक्य में एक ही क्रिया से अर्थ स्पष्ट हो जाए तो उसे मुख्य
क्रिया कहते हैं जैसे-
I राम
गया|
Ii सीता
ने पढ़ा|
संयुक्त क्रिया-जब
वाक्य में दो क्रिया हों जैसे-
राम चला गया|
सीता पढ़ाई कर चुकी|
नाम धातु क्रिया -नाम का अर्थ है-संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, अव्यय| इन शब्दों से जो
क्रिया बनती है, वह
नाम धातु क्रिया कहलाती है जैसे-
संज्ञा शब्द या पदों से नाम धातु क्रिया बनाना -
शरम से शरमाना
चमक से चमकाना
रंग से रंगना
धिक्कार से धिक्कारना
महक से महकाना
फिल्म से फिल्माना
ठग से ठगना
दुःख से दुखाना
सर्वनाम पदों से नामधातु क्रिया बनाना-
अपना से अपनाना
विशेषण पदों से नाम धातु
क्रिया बनाना -
साठ से सठियाना
चिकना से चिकनाना
मोटा से मुटियाना
लंगड़ा से लंगड़ाना
दोहरा से दोहराना
तोतला से तुतलाना
अव्यय पदों से नाम धातु क्रिया बनाना -
हिन्-हिन् से हिनहिनाना
थर -थर से थरथराना
बड़ -बड़ से बड़बड़ाना
गड-गड से गड़गड़ाना
भिन -भिन से भिनभिनाना
भड़ -भड़ से भड़भड़ाना
प्रेरणार्थक क्रिया
-ये भी दो प्रकार की होती हैं - प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया और द्वितीय
प्रेरणार्थक क्रिया